HINDI STORY

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Wednesday, 18 March 2020

Lalach buri Bala hai | Hindi story

लालच बुरी बला है


Lalach buri Bala hai | Hindi story


एक गांव में 4 दोस्त रहते थे चारों बहुत गरीब थे एक का नाम राम दूसरे का मोहन तीसरे का मनीष आज चौथे का गोपाल था राम मोहन और मनीष यह तीनों बहुत मेहनती थे और गोपाल बहुत लालची और कामचोर था यह तीनों हमेशा काम में व्यस्त रहते और खेतीबाड़ी करके अपने घर बाहर चलाते लेकिन मनीष हमेशा कोई ऐसा काम ढूंढता जिसमें उसको मेहनत भी ना करना पड़े और वह पैसे भी ज्यादा कमाए लेकिन उसको कोई ऐसा काम नहीं मिलता क्योंकि ना तो वह पढ़ा लिखा था और ना ही उसे कुछ आता था 

वह बस दिन भर एक पेड़ के नीचे बैठकर सोचता रहता कि मैं ऐसा कौन सा काम करूं जिससे मुझे बिना मेहनत के बहुत सारा धन मिल जाए एक बार वह एक बाबा के पास गया उसने बाबा से कहा कि बाबा मुझे कोई ऐसा रास्ता बताएं जिससे मैं अमीर हो जाऊं बाबा ने कहा रास्ता तो है लेकिन उसमें खतरा बहुत है गोपाल ने कहां के बाबा आप मुझे वह रास्ता बता दीजिए भले ही उसमें कितने भी खतरे हो मैं उसको पार करके उस रास्ते तक पहुंच जाऊंगा


बाबा ने उसको एक छोटी सी गेंद भी और गोपाल से कहा के इस गेंद को तुम्हें अपने हाथ में रखकर रात के 12: 00 बजे के वक्त जंगल की पहाड़ी पर जाना होगा जब तुम वहां जाओगे और जिस जगह तुम्हारे हाथ में यह गेंद चमकेगी तो तुम उस जगह पर खुदाई करना तुम्हें वहां कुछ ना कुछ जरूर प्राप्त होगा गोपाल यह सुनकर वहां से वापस आ गया और उसी पेड़ के नीचे आकर बैठ गया जहां वह हर वक्त बैठा रहता है

उसके तीनों दोस्त अपने अपने काम को निपटा कर अपने घर जा रहे थे गोपाल ने उन तीनों को आवाज दी और अपने पास बुलाया इन तीनों ने कहा के क्या हुआ गोपाल हमें तुमने इस तरह क्यों बुलाया गोपाल ने कहा कि मैं तुमसे हमेशा कहता था ना कि मैं कोई ऐसा काम जरूर ढूंढ लूंगा जिसमें बहुत सारा धन प्राप्त हो उसके दोस्तों ने उससे पूछा क्या तुम्हें ऐसा काम प्राप्त हो गया है जैसे तुम बहुत सारा धन कमा सको गोपाल ने कहा हां।

उन तीनों ने पूछा ऐसा कौन सा काम है गोपाल ने उन तीनों को पूरी बात बताई और अपने साथ जंगल में चलने को कहा तीनों ने जंगल में जाने से इंकार कर दिया और कहा के वहां बहुत सारे जंगली जानवर रहते हैं वहां कोई दिन में नहीं जाता और तुम हमें रात में जाने के लिए कह रहे हो हम में से कोई भी तुम्हारे साथ नहीं जाएगा हम अपनी खेती-बाड़ी से ही खुश है और हो सके तो तुम भी मत जाना ऐसा कहकर वह तीनों दोस्त वहां से जाने लगे तभी उसने उन तीनों को रोका और कहा किस सोचो अगर हमें वहां कोई सोने चांदी की चीज मिल गई तो हमें जिंदगी में कभी कुछ काम करने की आवश्यकता नहीं होगी

वह तीनों सोचने लगे और कहां के बात तो तुमने सही कही है हम भी काम कर कर के थक गए हैं अब तो यही लगता है कि जिंदगी भर आराम करें हम भी तुम्हारे साथ जंगल में चलेंगे गोपाल ने कहा ठीक है आज 12: 00 बजे के वक्त सब लोग मेरे घर पर आ जाना हम वहीं से उस पहाड़ी पर चलेंगे।


तीनो लोग 12: 00 बजे के वक्त गोपाल के घर पहुंच गए और जंगल की तरफ बड़े गोपाल अपने हाथ में उस गेंद को दिए हुए आगे बढ़ रहा था कुछ कदम ही आगे बढ़े थे कि गेंद चमकने लगी गोपाल ने कहा कि हमें यही खुदाई करनी चाहिए और चारों लोग वहां खुदाई करने लगे खुदाई करते करते उसमें से एक पीतल के सिक्कों की एक थैली निकली राम ने कहा मैं तो इतने से ही खुश हूं मैं इसे लेकर वापस जा रहा हूं गोपाल ने कहा क्या रे राम अभी तो हम कुछ कदम ही चले हैं तो हमें इतने सारे सिक्के मिले हैं तो क्या पता हमें आगे चांदी के भी सिक्के मिल जाएं राम ने कहा नहीं भाई मैं तो इतने से ही खुश हूं और यह कह कर वापस लौट गया और यह तीनों आगे बढ़ गए ।

कुछ देर चलने के बाद वह गेंद फिर से चमकी और तीनों वहां खुदाई करने लगे खुदाई करते करते उन्हें एक चांदी के सिक्कों की थैली मिली मनीष ने कहा के भाई मैं तो इसे लेकर वापस जा रहा हूं अब तुम लोग अकेले ही आगे जाओ गोपाल ने कहा अरे भाई अभी तो हम आज आधे रास्ते पर ही आए हैं क्या पता हमें आगे सोने के सिक्के भी मिल जाए मनीष ने कहा नहीं भाई मैं तो इतने से ही खुश हूं और यह कहकर मैं वापस लौट गया।

गोपाल और मोहन आगे बढ़ते रहे कुछ देर चलकर गेंद फिर से चमकी और दोनों लोग वही खुदाई करने लगे खुदाई करते करते उन्हें एक सोने के सिक्कों की थैली मिली मोहन ने कहा चलो भाई इसे लेकर वापस चलते हैं गोपाल बोला अरे मोहन अभी तो जंगल का थोड़ा रास्ता बाकी है तो हमें आगे चलना चाहिए क्या पता हमें आगे हीरे भी मिल जाए मोहन बोला नहीं अब मुझे से आगे नहीं जाना अब तुम्हें आगे जाना है तो जाओ मैं तो इतने से ही खुश हूं यह कहकर मोहन सोने की थैली लेकर वापस चला गया और गोपाल आगे बढ़ गया ।

आगे बढ़ते बढ़ते उसकी गेंद फिर से चमकी उसने वहां खुदाई शुरू कर दी खुदाई कर ही रहा था कि उसमें से एक रोशनी बाहर निकली और एक आदमी प्रकट हुआ गोपाल ने पूछा कि तुम कौन हो उस आदमी ने कहा मैं यमराज हूं मैं तेरे प्राण हरण करने आया हूं क्योंकि तू बहुत लालची और कामचोर है तेरे जैसे व्यक्ति का इस दुनिया में रहने का कोई अधिकार नहीं है गोपाल रोकर बोला के प्रभु मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई अगर आप मुझे माफ कर दे और मेरी जान बख्श दे तो मैं कभी दोबारा लालच और कमजोरी नहीं करूंगा यमराज ने कहा ठीक है मैं तुझे एक मौका जरूर दूंगा लेकिन जिस दिन तो लालच करेगा उस दिन तेरे प्राण हरण कर लूंगा यमराज यह कहकर वहां से चला गया और गोपाल वापस खाली हाथ लौट गया

फिर जब वह सुबह अपने दोस्तों से मिला तो उसके दोस्तों ने उसका मजाक उड़ा कर कहा कि क्या तुम्हें सोने चांदी से भी ज्यादा कीमती चीज मिली और यह कहकर वह तीनों हंसने लगे गोपाल बहुत ही नरम अंदाज में बोला कि मुझे जो चीज मिली है वह सोने और चांदी से कई ज्यादा कीमती है वे तीनों यह सुनकर हैरान हो गए और पूछने लगे कि ऐसी तुम्हें कौन सी चीज मिल गई जो सोने चांदी से भी ज्यादा कीमती है 


गोपाल ने कहा कि मुझे आगे यमराज जी मिले जिन्होंने मुझे मेरी गलती का अहसास दिलाया जो मेरे लिए सोने चांदी से भी ज्यादा कीमती है तीनों यह बात सुनकर बहुत खुश हुए और उन तीनों ने अपने हिस्से का कुछ कुछ हिस्सा गोपाल को दे दिया और वह चारों फिर से ईमानदारी से काम करने लगे। और फिर कभी गोपाल ने लालच और आलसी पर नहीं किया।

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